धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

चित्र
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:। 
मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।१।।
धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

अज्ञानरूपी धृतराष्ट्र और संयमरूपी संजय। अज्ञान मन के अन्तराल में रहता है। अज्ञान से आवृत्त मन धृतराष्ट्र जन्मान्ध है; किन्तु संयमरूपी संजय के माध्यम से वह देखता है, सुनता है और समझता है कि परमात्मा ही सत्य है, फिर भी जब तक इससे उत्पन्न मोहरूपी दुर्योधन जीवित है इसकी दृष्टि सदैव कौरवों पर रहती है, विकारों पर ही रहती है। 

शरीर एक क्षेत्र है। जब हृदय-देश में दैवी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर धर्मक्षेत्र बन जाता है और जब इसमें आसुरी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर कुरुक्षेत्र बन जाता है। ‘कुरु’ अर्थात् करो– यह शब्द आदेशात्मक है।


तीनों गुण मनुष्य को देवता से कीटपर्यन्त शरीरों में ही बाँधते हैं। जब तक प्रकृति और प्रकृति से उत्पन्न गुण जीवित हैं, तब तक ‘कुरु’ लगा रहेगा। अत: जन्म-मृत्युवाला क्षेत्र, विकारोंवाला क्षेत्र कुरुक्षेत्र है और परमधर्म परमात्मा में प्रवेश …

दिवाली 2020 कब हैं। पूरी जानकारी

दिवाली 2020 कब हैं। दीपावली, दिवाली या दीवाली ?


दिवाली 2020 कब हैं। पूरी जानकारी हिंदी में




• दिवाली 2020 14 नवंबर
• लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:28 से 19:23
• प्रदोष काल- 17:23 से 20:04
• वृषभ काल- 17:28 से 19:23
• अमावस्या तिथि आरंभ- 14:17 (14 नवंबर)
• अमावस्या तिथि समाप्त- 10:36 (15 नवंबर)


इसी दिन प्रभु श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। नरकासुर उस समय प्रागज्योतिषपुर (जो की आज दक्षिण नेपाल एक प्रान्त है) का राजा था। नरकासुर इतना क्रूर था की उसने देवमाता अदिति के शानदार बालियों तक को छीन लिया।


देवमाता अदिति श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की सम्बन्धी थी। नरकासुर ने कुल 16 भगवान की कन्याओं को बंधित कर के रखा था। श्री कृष्ण की मदद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और सभी देवी कन्याओं को उसके चंगुल से छुड़ाया।


श्री राम के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में 


यह कहानी सभी भारतीय को पता है कि हम दिवाली श्री राम जी के वनवास से लौटने की खुशी में मनाते हैं। मंथरा के गलत विचारों से पीड़ित हो कर भरत की माता कैकई  श्रीराम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनवद्ध कर देती हैं। ऐसे में श्रीराम अपने पिता के आदेश को सम्मान मानते हुए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़ते हैं। वहीं वन में रावण माता सीता का छल से अपहरण कर लेता है।


प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया। अमावस्या की काली रात रोशन भी रोशन हो गई। तब श्री राम सुग्रीव के वानर सेना और प्रभु हनुमान के साथ मिल कर रावण का वध करके सीता माता को छुड़ा लाते हैं। उस दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है और जब श्री राम अपने घर अयोध्या लौटते हैं तो पूरे राज्य के लोग उनके आने के खुशी में रात्री के समय दीप जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं। तब से यह दिन दीपावली के नाम से जाना जाता है।



दिवाली का त्यौहार जब आता है तो साथ में अनेक त्यौहार लेकर आता है। एक और यह जीवन में ज्ञान रुपी प्रकाश को लाने वाला है ।


दिवाली या कहें दीपावली भारतवर्ष में मनाया जाने वाला हिंदूओं का एक ऐसा पर्व है जिसके बारे में लगभग सब जानते हैं। अंधेरा मिट गया उजाला हो गया यानि कि अज्ञानता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश हर और फैलने लगा। इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है।


तो वहीं सुख-समृद्धि की कामना के लिये भी दिवाली से बढ़कर कोई त्यौहार नहीं होता इसलिये इस अवसर पर लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्यौहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाये जाते हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक हर लिहाज से दिवाली बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।


वर्तमान में तो इस त्यौहार ने धार्मिक भेदभाव को भी भुला दिया है और सभी धर्मों के लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाने लगे हैं।


हालांकि पूरी दुनिया में दिवाली से मिलते जुलते त्यौहार अलग-अलग नामों से मनाये जाते हैं लेकिन भारतवर्ष में विशेषकर हिंदूओं में दिवाली का त्यौहार बहुत मायने रखता है।


दिवाली और लक्ष्मी पूजा
 

घर में सुख-समृद्धि बने रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें इसके लिये दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखने के उपरांत सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये। माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। लग्न व मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिये।


टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कहानी राम कथा - SAR नारद मुनि, सनत्कुमार संवाद, राम कथा - कलियुग की स्थिति

कहानी राम कथा- नारद मुनि, सनत्कुमार संवाद,

Google ने भारत में लॉन्च किया Kormo जॉब पाएं