धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

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धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:। 
मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।१।।
धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

अज्ञानरूपी धृतराष्ट्र और संयमरूपी संजय। अज्ञान मन के अन्तराल में रहता है। अज्ञान से आवृत्त मन धृतराष्ट्र जन्मान्ध है; किन्तु संयमरूपी संजय के माध्यम से वह देखता है, सुनता है और समझता है कि परमात्मा ही सत्य है, फिर भी जब तक इससे उत्पन्न मोहरूपी दुर्योधन जीवित है इसकी दृष्टि सदैव कौरवों पर रहती है, विकारों पर ही रहती है। 

शरीर एक क्षेत्र है। जब हृदय-देश में दैवी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर धर्मक्षेत्र बन जाता है और जब इसमें आसुरी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर कुरुक्षेत्र बन जाता है। ‘कुरु’ अर्थात् करो– यह शब्द आदेशात्मक है।


तीनों गुण मनुष्य को देवता से कीटपर्यन्त शरीरों में ही बाँधते हैं। जब तक प्रकृति और प्रकृति से उत्पन्न गुण जीवित हैं, तब तक ‘कुरु’ लगा रहेगा। अत: जन्म-मृत्युवाला क्षेत्र, विकारोंवाला क्षेत्र कुरुक्षेत्र है और परमधर्म परमात्मा में प्रवेश …

वास्तविक ताकत- मुश्किल दौर का सामना ?


Success Mantra : संघर्ष में तलाशें अपनी वास्तविक ताकत ?




हर इंसान को कभी ना कभी मुश्किल दौर का सामना सामना करना पड़ता है तब यह पहचानने की कोशिश करना जरूरी हो जाता है
जब भी आप जीवन के किसी भी कठिन दौर से क्यों न गुजर रहे हो लेकिन आपको संभालने के लिए उम्मीद की एक किरण ही काफी है। 


 जैसे आपका मूड कितना भी खराब क्यों न हो लेकिन कुछ विचार या छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें देखकर हमारी उदासी हट जाती है। आज हम आपको ऐसे ही विचार बताएंगे, जिन्हेंं जीवन में उतारकर हर मुश्किल दौर का सामना कर सकते हैं-


आपकी कल्पना ही आपकी सीमा है ।


कहते हैं आपको जब तक कोई नहीं रोक सकता जब तक कि आप अपनी सीमा निर्धारित न कर लें। ऐसे में आपको अपनी कल्पनाओं में हमेशा कुछ बड़ा सोचना है, जिससे कि आपमें कुछ अच्छा करने और आगे बढ़ने की ललक बने रहे।




संघर्ष में अपनी ताकत तलाशें ।


आप जीवन में संघर्षों को परेशानियां नहीं बल्कि अपनी ताकत तलाशने के मौकों के रूप में देंखे। आप पाएंगे कि हर संघर्ष को पार करने के बाद आपका व्यक्तित्व काफी अच्छा हो जाएगा।


छोटी-छोटी चीजें आपके अच्छे दिन लाती हैं ।


आज जो काम आपको छोटा लग रहा है, वो एक दिन आपको दुनिया भर में पहचान दिलाएगा।ऐसे में छोटे-छोटे प्रयासों को बिल्कुल बंद न करें। हमेशा जीवन की छोटी-छोटी चीजों को पूरा करते हुए बड़े अर्थ साधें।


बीते हुए कल को आज पर हावी न होने दें ।


आपको बीते हुए कल को आज पर हावी नहीं होने देना है। हरिवंशराय बच्चन की कविता ‘जो बीत गई वो बात गई’ पर अमल करते हुए नए सिरे से हर दिन जीवन की नई शुरुआत करें।

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