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धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

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धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:। 
मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।१।।
धृतराष्ट्र ने पूछा– ‘‘हे संजय! धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र में एकत्र युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?’’

अज्ञानरूपी धृतराष्ट्र और संयमरूपी संजय। अज्ञान मन के अन्तराल में रहता है। अज्ञान से आवृत्त मन धृतराष्ट्र जन्मान्ध है; किन्तु संयमरूपी संजय के माध्यम से वह देखता है, सुनता है और समझता है कि परमात्मा ही सत्य है, फिर भी जब तक इससे उत्पन्न मोहरूपी दुर्योधन जीवित है इसकी दृष्टि सदैव कौरवों पर रहती है, विकारों पर ही रहती है। 

शरीर एक क्षेत्र है। जब हृदय-देश में दैवी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर धर्मक्षेत्र बन जाता है और जब इसमें आसुरी सम्पत्ति का बाहुल्य होता है तो यह शरीर कुरुक्षेत्र बन जाता है। ‘कुरु’ अर्थात् करो– यह शब्द आदेशात्मक है।


तीनों गुण मनुष्य को देवता से कीटपर्यन्त शरीरों में ही बाँधते हैं। जब तक प्रकृति और प्रकृति से उत्पन्न गुण जीवित हैं, तब तक ‘कुरु’ लगा रहेगा। अत: जन्म-मृत्युवाला क्षेत्र, विकारोंवाला क्षेत्र कुरुक्षेत्र है और परमधर्म परमात्मा में प्रवेश …

कहानी राम कथा- नारद मुनि, सनत्कुमार संवाद,

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दूसरा अध्याय- श्री राम कथा
सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार ऋषियों ने पूछा
 महामुने! देवर्षि नारद मुनि ने सनत्कुमार जी से रामायण सम्बन्धी सम्पूर्ण धर्मों का किस प्रकार वर्णन किया था? उन दोनों ब्रह्मवादी महात्माओं का किस क्षेत्र में मिलन हुआ था? तात! वे दोनों कहाँ ठहरे थे? नारद जी ने उनसे जो कुछ कहा था, वह सब आप हम लोगों को बताइये।

मुनिवरो! सनकादि महात्मा भगवान् ब्रह्मा जी के पुत्र माने गये हैं। उनमें ममता और अहंकार का तो नाम भी नहीं है। वे सब-के-सब ऊर्ध्वरेता (नैष्ठिक ब्रह्मचारी) हैं।

ब्राह्मणो! इतने में ही देवर्षि नारद मुनि भगवान के नारायण आदि नामों का उच्चारण करते हुए वहाँ आ पहुँचे।

मैं आप लोगों से उनके नाम बताता हूँ, सुनिये। सनक, सनन्दन, सनत्कुमार और सनातन—ये चारों सनकादि माने गये हैं। वे ‘नारायण! अच्युत! अनन्त! वासुदेव! जनार्दन! यज्ञेश! यज्ञपुरुष! राम! विष्णो! आपको नमस्कार है।’ इस प्रकार भगवन नाम का उच्चारण करके सम्पूर्ण जगत को पवित्र बनाते और एकमात्र लोक पावनी गंगा की स्तुति करते हुए वहाँ आये।

दूसरा अध्याय उन्हें आते …

कहानी राम कथा - SAR नारद मुनि, सनत्कुमार संवाद, राम कथा - कलियुग की स्थिति

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पहला अध्याय - राम कथा कहानी, SAR कलियुग की स्थिति, भगवान श्री राम कथा- कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायण पाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन श्री रामचन्द्र जी समस्त संसार को शरण देने वाले हैं।
कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायण पाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन श्री रामचन्द्र जी समस्त संसार को शरण देने वाले हैं। श्री राम के बिना दूसरी कौन-सी गति है। श्री राम कलियुग के समस्त दोषों को नष्ट कर देते हैं; अत: श्री रामचन्द्र जी को नमस्कार करना चाहिये। श्री राम से कालरूपी भयंकर सर्प भी डरता है। जगत का सब कुछ भगवान् श्री राम के वश में है। श्री राम में मेरी अखण्ड भक्ति बनी रहे। हे राम! आप ही मेरे आधार हैं।

चित्रकूट में निवास करने वाले, भगवती लक्ष्मी (सीता) के आनन्द निकेतन और भक्तों को अभय देने वाले परमानन्द स्वरूप भगवान् श्री रामचन्द्र जी को मैं नमस्कार करता हूँ।

सम्पूर्ण जगत के अभीष्ट मनोरथों को सिद्ध करने वाले (अथवा सृष्टि, पालन एवं संहार के द्वारा जगत की व्यावहारिक सत्ता को सिद्ध करने वाले), ब्रह्मा, विष्…

दिवाली 2020 कब हैं। पूरी जानकारी

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दिवाली 2020 कब हैं। दीपावली, दिवाली या दीवाली ?





• दिवाली 2020 14 नवंबर
• लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 17:28 से 19:23
• प्रदोष काल- 17:23 से 20:04
• वृषभ काल- 17:28 से 19:23
• अमावस्या तिथि आरंभ- 14:17 (14 नवंबर)
• अमावस्या तिथि समाप्त- 10:36 (15 नवंबर)

इसी दिन प्रभु श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। नरकासुर उस समय प्रागज्योतिषपुर (जो की आज दक्षिण नेपाल एक प्रान्त है) का राजा था। नरकासुर इतना क्रूर था की उसने देवमाता अदिति के शानदार बालियों तक को छीन लिया।
देवमाता अदिति श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की सम्बन्धी थी। नरकासुर ने कुल 16 भगवान की कन्याओं को बंधित कर के रखा था। श्री कृष्ण की मदद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और सभी देवी कन्याओं को उसके चंगुल से छुड़ाया।
श्री राम के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में 
यह कहानी सभी भारतीय को पता है कि हम दिवाली श्री राम जी के वनवास से लौटने की खुशी में मनाते हैं। मंथरा के गलत विचारों से पीड़ित हो कर भरत की माता कैकई  श्रीराम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनवद्ध कर देती हैं। ऐसे में श्रीराम अपने पिता के आदेश को सम्मान मानते हुए म…

वास्तविक ताकत- मुश्किल दौर का सामना ?

Success Mantra : संघर्ष में तलाशें अपनी वास्तविक ताकत ?


हर इंसान को कभी ना कभी मुश्किल दौर का सामना सामना करना पड़ता है तब यह पहचानने की कोशिश करना जरूरी हो जाता है
जब भी आप जीवन के किसी भी कठिन दौर से क्यों न गुजर रहे हो लेकिन आपको संभालने के लिए उम्मीद की एक किरण ही काफी है। 
 जैसे आपका मूड कितना भी खराब क्यों न हो लेकिन कुछ विचार या छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें देखकर हमारी उदासी हट जाती है। आज हम आपको ऐसे ही विचार बताएंगे, जिन्हेंं जीवन में उतारकर हर मुश्किल दौर का सामना कर सकते हैं-
आपकी कल्पना ही आपकी सीमा है ।
कहते हैं आपको जब तक कोई नहीं रोक सकता जब तक कि आप अपनी सीमा निर्धारित न कर लें। ऐसे में आपको अपनी कल्पनाओं में हमेशा कुछ बड़ा सोचना है, जिससे कि आपमें कुछ अच्छा करने और आगे बढ़ने की ललक बने रहे।


संघर्ष में अपनी ताकत तलाशें ।
आप जीवन में संघर्षों को परेशानियां नहीं बल्कि अपनी ताकत तलाशने के मौकों के रूप में देंखे। आप पाएंगे कि हर संघर्ष को पार करने के बाद आपका व्यक्तित्व काफी अच्छा हो जाएगा।
छोटी-छोटी चीजें आपके अच्छे दिन लाती हैं ।
आज जो काम आपको छोटा लग रहा है, वो…

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